उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun kahta hai mahw-e-KHwab hun main

कौन कहता है महव-ए-ख़्वाब हूँ मैं

کون کہتا ہے محو خواب ہوں میں

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन कहता है महव-ए-ख़्वाब हूँ मैं
सच तो वो है कि इंक़लाब हूँ मैं

ज़िंदगी क्या है और मौत है क्या
इन सवालात का जवाब हूँ मैं

ख़ौफ़ खाती है मुझ से ख़ामोशी
दश्त में गूँजता रबाब हूँ मैं

शहर के भेड़ियों से क्या डरना
जंगली शेर सा शबाब हूँ मैं

हर वरक़ जिस का आग और धुआँ
दास्तानों की वो किताब हूँ मैं

तुम अंधेरे में क्यों चले आए
रौशनी में भी बे-हिसाब हूँ मैं

मुझ को जुगनू का नाम दे के न हँस
अपनी दुनिया का आफ़्ताब हूँ मैं