उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun aisa hai yahan dil se mujhe yaad kare

कौन ऐसा है यहाँ दिल से मुझे याद करे

کون ایسا ہے یہاں دل سے مجھے یاد کرے

शायर: Sabiha Sumbul6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन ऐसा है यहाँ दिल से मुझे याद करे
वक़्त थोड़ा सा मिरे वास्ते बर्बाद करे

हो गईं बस्तियाँ वीरान यहाँ पल भर में
कोई तो आए जो फिर से इन्हें आबाद करे

पा-ब-ज़ंजीर कोई दार पे मंसूर नहीं
हक़ की बातों पे भला कौन यहाँ साद करे

कैसा पिंदार है दिल क़ैद हैं ख़ुशियाँ जिस में
इन परिंदों को ही आज़ाद ये सय्याद करे

मुर्दा जिस्मों में मुक़य्यद हैं तड़पती रूहें
कोई ज़िंदान-ए-निहाँ से उन्हें आज़ाद करे

जिस की बुनियाद मोहब्बत की हो ज़ामिन 'सुम्बुल'
ऐसा इक शहर यहाँ कोई तो आबाद करे