उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karta hai koi ab bhi pazirai hamari

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी

کرتا ہے کوئی اب بھی پذیرائی ہماری

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी
रुस्वाई भी लगती नहीं रुस्वाई हमारी

हम देख के दुनिया भी तुझे देख न पाए
बेकार पड़ी रह गई बीनाई हमारी

लगता है बिछड़ कर भी नज़र आते रहेंगे
है उस के महल्ले में शनासाई हमारी

हम तेरे ख़यालों में भटकते रहे बेजा
आवाज़ लगाती रही तन्हाई हमारी

अब सब से मुसव्विर का पता पूछ रहा है
इतनी उसे तस्वीर पसंद आई हमारी

रुस्वाई पे हम नाज़ करें क्यों न बताएँ
जब आप से मंसूब है रुस्वाई हमारी