उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar na le apna Thikana dushman

कर न ले अपना ठिकाना दुश्मन

کر نہ لے اپنا ٹھکانہ دشمن

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कर न ले अपना ठिकाना दुश्मन
दोस्त नादान है दाना दुश्मन

देखे गर उस की पलक या-अल्लाह
तो हो तीरों का निशाना दुश्मन

दीदा-ए-तर न बहाना आँसू
ढूँढते हैं ये बहाना दुश्मन

दोस्त को दोस्त न समझा तुम ने
और दुश्मन को न जाना दुश्मन

दोस्ती की न रहे फिर उम्मीद
काश हो जाए ज़माना दुश्मन

दुश्मन-ए-जाँ हैं बहुत पर ऐ इश्क़
तुझे जाना तुझे माना दुश्मन

तुम समझते हो उसे यार-ए-क़दीम
दिल है ऐ 'दाग़' पुराना दुश्मन