उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar gai gul-tab rangon ki farawani hamein

कर गई गुल-ताब रंगों की फ़रावानी हमें

کر گئی گل تاب رنگوں کی فراوانی ہمیں

शायर: Parwez Rahmani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कर गई गुल-ताब रंगों की फ़रावानी हमें
नूर सा रंग दे गया शौक़-ए-ग़ज़ल-रानी हमें

दामन-ए-दिल बे-ज़मीरी से बचा पाए न हम
लग गया आख़िर को शहर-ए-ग़ैर का पानी हमें

मुफ़्त में बैठे बिठाए सारी दुनिया देख ली
मिल न पाई थी कभी ऐसी तन-आसानी हमें

ख़ुद-पसंदी देखी तेरी ख़ुद-सरी भी देख ली
और क्या दिखलाएगा ऐ दुश्मन-ए-जानी हमें

तेरी मर्ज़ी हो तो चख लें अपनी मर्ज़ी का मज़ा
ज़िंदगी कर लेने दे थोड़ी सी मन-मानी हमें

ज़िंदगी पर बंद हो कर रह गए हैं रास्ते
किस जगह ले आई है इस दिल की मन-मानी हमें

बावजूद इस के परायों के न दिल ठंडे हुए
बे-तरह महँगी पड़ी अपनों की क़ुर्बानी हमें

यूँ तो घर वाले बुलाया करते हैं अब्दुल-हसीब
वैसे दुनिया कहती है 'परवेज़'-रहमानी हमें