उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kamal dekhiye sab ka yaqin jalaya gaya

कमाल देखिए सब का यक़ीं जलाया गया

کمال دیکھیے سب کا یقیں جلایا گیا

शायर: Aadarsh Dubey4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कमाल देखिए सब का यक़ीं जलाया गया
मैं इक चराग़ हूँ मुझ को नहीं जलाया गया

ये सानेहा भी किसी बुग़्ज़ की अलामत है
मकान छोड़ दिया और मकीं जलाया गया

ख़ुदा का इस से बड़ा और क्या करम होगा
जहाँ बुझाया था मुझ को वहीं जलाया गया

उसे बताना हवा से नहीं जहाँ से बचे
कोई चराग़ अगर अब कहीं जलाया गया