उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaj-kulahon ne bahut shor macha rakkha hai

कज-कुलाहों ने बहुत शोर मचा रक्खा है

کج کلاہوں نے بہت شور مچا رکھا ہے

शायर: Lucky farooqi Hasrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कज-कुलाहों ने बहुत शोर मचा रक्खा है
चोर-उचक्कों ने बहुत शोर मचा रक्खा है

अपनी आँखों से कहो बोलें मगर आहिस्ता
इन चराग़ों ने बहुत शोर मचा रक्खा है

वज्ह-ए-तोहमत हैं मिरे जिस्म पे बोसों के निशाँ
कुछ गुनाहों ने बहुत शोर मचा रक्खा है

अबू-इसहाक़ तिरी फिर से ज़रूरत है हमें
शिम्र-ज़ादों ने बहुत शोर मचा रक्खा है

मलक-उल-मौत तिरी सुस्त-ख़िरामी के सबब
चंद साँसों ने बहुत शोर मचा रक्खा है

इक रबर बैंड लो और बाँध दो ज़ुल्फ़ें अपनी
इन घटाओं ने बहुत शोर मचा रक्खा है