उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaisi kaisi bastiyan do din mein viran ho gain

कैसी कैसी बस्तियाँ दो दिन में वीराँ हो गईं

کیسی کیسی بستیاں دو دن میں ویراں ہو گئیں

शायर: Yagana Changezi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कैसी कैसी बस्तियाँ दो दिन में वीराँ हो गईं
देखते ही देखते गर्द-ए-परेशाँ हो गईं

शग़्ल-ए-मय कब तक ये साक़ी आँखें झुक आएँ बहुत
रात भीगी और ज़ुल्फ़ें भी परेशाँ हो गईं

फिरती हैं आँखों में साक़ी शब की वो कैफ़िय्यतें
देखते ही देखते ख़्वाब-ए-परेशाँ हो गईं

ताक़त-ए-मजनूँ कुजा नज़्ज़ारा़-ए-लैली कुजा
पर्दा-ए-महमिल उठा और आँखें हैराँ हो गईं

अर्सा-ए-क़ैद-ए-हयात अब वहशियों पर तंग है
चार दीवार-ए-अनासिर मिल के ज़िंदाँ हो गईं

रास आई है न आएगी ज़माने की हवा
'यास' क्या क्या सोहबतें गर्द-ए-परेशाँ हो गईं