उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaisa lahja tha kis haal mein wo rahi ek hi sans mein

कैसा लहजा था किस हाल में वो रही एक ही साँस में

کیسا لہجہ تھا کس حال میں وہ رہی ایک ہی سانس میں

शायर: Tahir Hanfi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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कैसा लहजा था किस हाल में वो रही एक ही साँस में
कहने वाली कहानी मिरी कह गई एक ही साँस में

ये भला क्या कि इक एक घूँट अपने अंदर उतरता रहे
मय अगर तू ने पीनी है तो सारी पी एक ही साँस में

एक ही साँस में है समाया हुआ ये जहाँ ऐ ख़ुदा
हम ने सारी ख़ुदाई तिरी देख ली एक ही साँस में

जितने भी अहल-ए-महफ़िल थे मुँह वो मिरा देखते रह गए
बज़्म में उन की तारीफ़ कुछ ऐसे की एक ही साँस में

उन के होंटों का लम्स ऐसे चेहरे पे महसूस होता रहा
हम ने सारी हयाती यूँही काट ली एक ही साँस में

एक ही साँस में हम ने 'ताहिर' सभी कुछ कहा आप से
जो भी कहना है कह दीजिए आप भी एक ही साँस में