उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaisa jashn-e-bahaar hai apna

कैसा जश्न-ए-बहार है अपना

کیسا جشن بہار ہے اپنا

शायर: Kailash Mahir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कैसा जश्न-ए-बहार है अपना
गुल पे साया भी बार है अपना

सिसकियाँ ले रही है शाम-ए-फ़िराक़
फिर मुझे इंतिज़ार है अपना

इश्क़ का राग किस ने छेड़ दिया
हर नफ़स शो'ला-बार है अपना

क्या गिला तेरी कम-निगाही से
कब हमें ए'तिबार है अपना

नीची नज़रों से पूछ मत अहवाल
ज़ब्त-ए-ग़म ही शिआ'र है अपना

क्या हुआ ज़िंदगी न रास आई
मौत पर ए'तिबार है अपना

क़ैस को लोग जब से भूल गए
पैरहन तार तार है अपना