उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahta yahi ghubar-e-sar-e-rahguzar hai

कहता यही ग़ुबार-ए-सर-ए-रहगुज़ार है

کہتا یہی غبار سر رہ گزار ہے

शायर: Jagdish Sahay Saxena5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहता यही ग़ुबार-ए-सर-ए-रहगुज़ार है
लेना क़दम हर इक के हमारा शिआ'र है

हैं दफ़्न इस में अहद-ए-जवानी की हसरतें
पहलू में दिल नहीं है हमारे मज़ार है

काँटे तड़प रहे हैं इन्हें पूछता है कौन
गुल के लिए ही बाग़ में फ़स्ल-ए-बहार है

दिल को ब-क़द्र-ए-शौक़ न राहत मिली न ग़म
तक़दीर में ग़रीब की गुल है न ख़ार है

अश्क-ए-वफ़ा से गर्द-ए-कुदूरत न धुल सकी
या'नी तुम्हारे दिल में अभी तक ग़ुबार है