उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kah chuke haal raaz baqi hai

कह चुके हाल राज़ बाक़ी है

کہہ چکے حال راز باقی ہے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कह चुके हाल राज़ बाक़ी है
नाज़ उठाए नियाज़ बाक़ी है

मंज़िल-ए-इश्क़ तय हुई फिर भी
राह-ए-दूर-ओ-दराज़ बाक़ी है

तू ने नग़्मे भी दिल से छीन लिए
तार टूटे हैं साज़ बाक़ी है

सज्दों से बंदगी नहीं होती
सर झुका है नमाज़ बाक़ी है

दिल तो तीरों से हो गया छलनी
और अभी मश्क़-ए-नाज़ बाक़ी है

सोहबत-ए-शब तो हो गई आख़िर
एक ग़म-ए-जाँ गुदाज़ बाक़ी है

तर्क-ए-उल्फ़त के बावजूद 'हबीब'
दिल में एक फ़ित्ना-साज़ बाक़ी है