उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kadam ki chhanw mein bansi baja raha hai koi

कदम की छाँव में बंसी बजा रहा है कोई

کدم کی چھانو میں بنسی بجا رہا ہے کوئی

शायर: Jagdish Sahay Saxena7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कदम की छाँव में बंसी बजा रहा है कोई
फ़ज़ा-ए-बुर्ज को बे-ख़ुद बना रहा है कोई

तड़प रही थीं जो मौजें वो सोई जाती हैं
ज़रूर साहिल-ए-जमना पे गा रहा है कोई

सुकूत-ए-शाम में गाना है किस क़दर पुर-कैफ़
शराब-ए-नाब के दरिया बहा रहा है कोई

सुना था रूह ने जन्नत में जो लब-ए-कौसर
वही तराना-ए-दिलकश सुना रहा है कोई

सदा जो कान में आई तो गोपियाँ बोलीं
उठो उठो कि हमीं को बुला रहा है कोई

ग़ज़ब का सोज़ ख़ुदाया है नाला-ए-नै में
दिल-ओ-जिगर को हमारे जला रहा है कोई

कहीं तड़प है ये नग़्मा कहीं सुकून-ओ-क़रार
जगा रहा है कोई या सुला रहा है कोई