उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kab wo zahir hoga aur hairan kar dega mujhe

कब वो ज़ाहिर होगा और हैरान कर देगा मुझे

کب وہ ظاہر ہوگا اور حیران کر دے گا مجھے

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कब वो ज़ाहिर होगा और हैरान कर देगा मुझे
जितनी भी मुश्किल में हूँ आसान कर देगा मुझे

रू-ब-रू कर के कभी अपने महकते सुर्ख़ होंट
एक दो पल के लिए गुल-दान कर देगा मुझे

रूह फूँकेगा मोहब्बत की मिरे पैकर में वो
फिर वो अपने सामने बे-जान कर देगा मुझे

ख़्वाहिशों का ख़ूँ बहाएगा सर-ए-बाज़ार-ए-शौक़
और मुकम्मल बे-सर-ओ-सामान कर देगा मुझे

मुंहदिम कर देगा आ कर सारी तामीरात-ए-दिल
देखते ही देखते वीरान कर देगा मुझे

एक ना-मौजूदगी रह जाएगी चारों तरफ़
रफ़्ता रफ़्ता इस क़दर सुनसान कर देगा मुझे

या तो मुझ से वो छुड़ा देगा ग़ज़ल-गोई 'ज़फ़र'
या किसी दिन साहिब-ए-दीवान कर देगा मुझे