उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kab tak wahi sarab wahi iztirab ho

कब तक वही सराब वही इज़्तिराब हो

کب تک وہی سراب وہی اضطراب ہو

शायर: Aamir Azher3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कब तक वही सराब वही इज़्तिराब हो
मैं ही करूँ भी याद मुझी पर 'अज़ाब हो

पढ़ते तो हों कई पे समझता न हो कोई
ऐसा न हो कि दिल भी ख़ुदा की किताब हो

माँगी जो जा रही है दु'आ कामयाबी की
अपनी तो ये दु'आ है दु'आ कामयाब हो