उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kash ki main bhi hota patthar

काश कि मैं भी होता पत्थर

کاش کہ میں بھی ہوتا پتھر

शायर: Varun Anand7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काश कि मैं भी होता पत्थर
गर था उन को प्यारा पत्थर

लोगो की तो बात करें क्या
तेरा दिल भी निकला पत्थर

हम दोनों में बनती कैसे
एक था शीशा दूजा पत्थर

शीशा तो कमज़ोर बड़ा था
फिर भी कैसे टूटा पत्थर

सब के हिस्से हीरे मोती
मेरे हिस्से आया पत्थर

पारस था वो तुम ने जाना
सब ने जिस को समझा पत्थर

कल तक फूल थे जिन हाथों में
उन हाथों में आज था पत्थर