उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaamyabon mein kaamranon mein

कामयाबों में कामरानों में

کامیابوں میں کامرانوں میں

शायर: Tahir Saood Kiratpuri11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कामयाबों में कामरानों में
हम बड़े हैं बड़े घरानों में

वो ख़मोशी है 'अक़्ल-ख़ानों में
सीटियाँ बज रही हैं कानों में

किस तरह क़हत-ए-फ़िक्र आ पहुँचा
होश-मंदों में फ़िक्र-दानों में

हिज्र हर दिन मनाया जाता है
'इश्क़ वालों के ख़ानदानों में

उन की कमियों को ढक दिया कीजे
दिल भी है दिल के कार-ख़ानों में

तुम भी कमज़ोर आदमी निकले
तुम भी जा बैठे बद-गुमानों में

मेरी झोली में डाल दे उस को
क्या कमी है तिरे ख़ज़ानों में

हम ने पत्थर सजे हुए देखे
क़ीमती काँच की दुकानों में

आज क्यों चाँद इतना रौशन है
हँस पड़ा कौन आसमानों में

उग पड़े बाँझ धरतियों से गुलाब
बोल उठे लोग बे-ज़बानों में

मेरे शे'रों पे तब्सिरा है 'स'ऊद'
गुल-कदों में गुलाब-ख़ानों में