उर्दू शायरी · ग़ज़ल

justuju ke panw ab aaram sa pane lage

जुस्तुजू के पाँव अब आराम सा पाने लगे

جستجو کے پاؤں اب آرام سا پانے لگے

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुस्तुजू के पाँव अब आराम सा पाने लगे
अब हमारे पास भी कुछ रास्ते आने लगे

वक़्त और हालात पर क्या तब्सिरा कीजे कि जब
एक उलझन दूसरी उलझन को सुलझाने लगे

शहर में जुर्म-ओ-हवादिस इस क़दर हैं आज-कल
अब तो घर में बैठ कर भी लोग घबराने लगे

दिल में आ बैठा है देखो दूरियों का देवता
हम जमा'अत के तसव्वुर से भी उकताने लगे

तुम किसी मज़लूम की आवाज़ बन कर गूँजना
याद मेरी जब तुम्हें शिद्दत से तड़पाने लगे

ले रहा है दर्द अंगड़ाई उठा वो एहतिजाज
ज़ख़्म-ख़ुर्दा सब परिंदे पंख फैलाने लगे

काम ऐसा क्यूँ किया जाए कि जिस के बा'द में
आदमी अपने किए पर आप पछताने लगे