उर्दू शायरी · ग़ज़ल

junun-e-ishq kisi ko bhi yun na ras aae

जुनून-ए-इश्क़ किसी को भी यूँ न रास आए

جنون عشق کسی کو بھی یوں نہ راس آئے

शायर: Kaif Moradaabadi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुनून-ए-इश्क़ किसी को भी यूँ न रास आए
वो मेरे पास तो आए मगर उदास आए

जिसे हयात किसी रुख़ से भी न रास आए
किसी के पास न जाए हमारे पास आए

वहाँ से जल्द गुज़र जाएँ रहरवान-ए-हयात
जहाँ भी राह में कोई मक़ाम-ए-यास आए

फ़िराक़-ओ-वस्ल की रूदाद मुख़्तसर ये है
कभी वो पास से गुज़रे कभी वो पास आए

कुछ ऐसे लोग भी देखे जो बज़्म-ए-जानाँ में
उदास उदास गए और उदास उदास आए

ये इज़्तिराब नहीं ने'मत-ए-मुसलसल है
ख़ुदा करे कोई आलम मुझे न रास आए

किसी ने एक इशारे को भी नहीं समझा
हुज़ूर दोस्त बहुत से अदा-शनास आए

ग़म-ए-हयात-ओ-ग़म-ए-दहर बख़्शने वाले
इक ऐसा ग़म भी अता कर जो दिल को रास आए

अदब में 'कैफ़' का दम भी बहुत ग़नीमत है
मुहाल है कि अब ऐसा सुख़न-शनास आए