उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo sar par hai shajar mera nahin hai

जो सर पर है शजर मेरा नहीं है

جو سر پر ہے شجر میرا نہیں ہے

शायर: Tahira Jabeen5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो सर पर है शजर मेरा नहीं है
मकीं हूँ और घर मेरा नहीं है

किसी का है मगर मेरा भी है वो
जो मेरा है मगर मेरा नहीं है

मुक़र्रर जिस तरफ़ मंज़िल है मेरी
उसी जानिब सफ़र मेरा नहीं है

हूँ लब-बस्ता कि तू मुजरिम न ठहरे
मेरी जाँ ये मफ़र मेरा नहीं है

पुकारूँ क्या उसे गर है वो मेरा
न लौटेगा अगर मेरा नहीं है