उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo kuchh apne tain joDa maine

जो कुछ अपने तईं जोड़ा मैं ने

جو کچھ اپنے تئیں جوڑا میں نے

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो कुछ अपने तईं जोड़ा मैं ने
दूसरी तरह से तोड़ा मैं ने

किस घड़ी जानिए क्या कर बैठूँ
ख़ुद को तन्हा नहीं छोड़ा मैं ने

कर दिया उस को ज़ियादा वापस
रक्खा अपने लिए थोड़ा मैं ने

मेरा अपना ही बयाँ था जिस को
बा'द में तोड़ा-मरोड़ा मैं ने

मैं ने सोए हुए से कुछ न कहा
जागते को ही झिंझोड़ा मैं ने

कोई उल्टा ही सफ़र था दरपेश
कस दिया ज़ीन पे घोड़ा मैं ने

देखिए अपना ही भांडा कैसे
'ऐन चौराहे पे फोड़ा मैं ने

शे'र फीका ही रहा जिस पे 'ज़फ़र'
दिल का लीमूँ भी निचोड़ा मैं ने