उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo dil nahin rakhta koi mushkil nahin rakhta

जो दिल नहीं रखता कोई मुश्किल नहीं रखता

جو دل نہیں رکھتا کوئی مشکل نہیں رکھتا

शायर: Yagana Changezi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो दिल नहीं रखता कोई मुश्किल नहीं रखता
मुश्किल नहीं रखता कोई जो दिल नहीं रखता

खींचे लिए जाता है कहीं शौक़-ए-शहादत
दम लेने की ताब अब दिल-ए-बिस्मिल नहीं रखता

हों रेग के मानिंद शब-ओ-रोज़ सफ़र में
आवारा-ए-वहशत कोई मंज़िल नहीं रखता

मजबूर हूँ क्या ज़ोर चले जोश-ए-जुनूँ से
ज़ंजीर कोई पाँव के क़ाबिल नहीं रखता

का'बे से हो या देर से मंज़िल पे पहुँच जाऊँ
इक धुन है तमीज़-ए-हक़-ओ-बातिल नहीं रखता

मय-ख़ाने को देखे कोई इन आँखों से ग़ाफ़िल
इक नूर का दरिया है कि साहिल नहीं रखता

कौसर भी खिंच आए तो ये निय्यत नहीं भरती
दरिया-ए-हवस वो है कि साहिल नहीं रखता

आया न कोई ख़्वाब में भी मुल्क-ए-'अदम से
अफ़्सोस कि इतनी भी कशिश दिल नहीं रखता

लैला को भला देखेगा किन आँखों से मजनूँ
जब ताक़त-ए-नज़्ज़ारा-ए-महमिल नहीं रखता

क्यूँ 'यास' क़फ़स में भी वही ज़मज़मा-संजी
ऐसा तो ज़माने में कोई दिल नहीं रखता