उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo dard mein rahat pa na sake ulfat ki haqiqat kya jaane

जो दर्द में राहत पा न सके उल्फ़त की हक़ीक़त क्या जाने

جو درد میں راحت پا نہ سکے الفت کی حقیقت کیا جانے

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो दर्द में राहत पा न सके उल्फ़त की हक़ीक़त क्या जाने
परवाना-सिफ़त जो जल न सके सरशारी-ए-उल्फ़त क्या जाने

हर-वक़्त है कोई पेश-ए-नज़र यकसाँ है किसी की शाम-ओ-सहर
महरूमी-ए-क़ुर्बत के सदमे नाकाम-ए-मोहब्बत क्या जाने

शिकवा भी करें तो किस से करें मासूम-नज़र मासूम-अदा
जैसे वो मोहब्बत क्या समझे जैसे वो अदावत क्या जाने

सर-चश्मा-ए-उल्फ़त हो कर भी बेगाना-ए-राह-ए-उल्फ़त है
क्यों ताब-ओ-तवाँ हम खो बैठे वो चश्म-ए-इनायत क्या जाने

उम्मीद की पैहम ग़म-ख़्वारी बेताबी में भी सरशारी
क्या हिज्र में लज़्ज़त मिलती है आसूदा-ए-उल्फ़त क्या जाने

जब दिल में हुजूम-ए-यास हुआ दो आँसू आँख से बह निकले
जाँ-दादा-ए-राह-ओ-रस्म-ए-वफ़ा दर-पर्दा शिकायत क्या जाने

ऐ नासेह-ए-मुश्फ़िक़ इस के सिवा क्या तुझ को बताएँ क्या है मज़ा
देखी ही नहीं जब उस की नज़र तो नश्शा-ए-उल्फ़त क्या जाने