उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo andheri chhat pe KHayal hain unhen raushni mein utar le

जो अँधेरी छत पे ख़याल हैं उन्हें रौशनी में उतार ले

جو اندھیری چھت پہ خیال ہیں انہیں روشنی میں اتار لے

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो अँधेरी छत पे ख़याल हैं उन्हें रौशनी में उतार ले
ये जो हुस्न है तिरी सोच में उसे शाइरी में उतार ले

ऐ सुख़न-शनास-ए-जदीद सुन कोई हर्फ़ तुझ से न छूट जाए
जो न मर्सिया को क़ुबूल हो उसे रुख़्सती में उतार ले

तुझे ज़िंदगी किसी मोड़ पर कोई काम आए तो फ़ोन कर
मिरे नम्बरात सँभाल कर किसी डाइरी में उतार ले

तिरे नाम को तिरे दुश्मनाँ लब-ए-आसमान पे पाएँगे
ये जो गुफ़्तुगू में जुनून है उसे ख़ामुशी में उतार ले

ज़रा फ़ारसी के इमाम सुन मैं ज़बान-ए-हिन्द में हूँ तो क्या
मैं तिरे मिज़ाज का लफ़्ज़ हूँ मुझे फ़ारसी में उतार ले

ये जो ऊँचे ऊँचे मकान हैं उन्हें देख कर न मलूल हो
तिरा सब्र-ओ-ज़ब्त नसीब है दिल-ए-मुफ़्लिसी में उतार ले

ये यक़ीन शर्त-ए-यक़ीन है वो अमीन है वो अमीन है
ऐ 'सऊद' उस को यक़ीन से रग-ए-ज़िंदगी में उतार ले