उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis waqt naha kar tu kisi jhil se nikle

जिस वक़्त नहा कर तू किसी झील से निकले

جس وقت نہا کر تو کسی جھیل سے نکلے

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस वक़्त नहा कर तू किसी झील से निकले
वो पल न मिरी आँख की तहवील से निकले

नम कर गईं काग़ज़ को तिरे हिज्र की नज़्में
इस बाब में आँसू बड़ी तफ़्सील से निकले

अरबाब-ए-सियासत से मदद माँग के कुछ लोग
इस मुल्क से बाहर हैं किसी डील से निकले

औरों के लिए वज्ह-ए-तफ़ाख़ुर हैं सर-ए-दस्त
जो ला'ल-ओ-गुहर थे मिरी ज़म्बील से निकले

इक बात थी क़ुरआन की आयत तो नहीं थी
फिर भी जो म'आनी मिरी तावील से निकले

मत पूछ कि इस बात की जो मुझ को ख़ुशी है
आँसू हैं हर इक शे'र की तकमील से निकले

उन को भी ज़माने की हवा लग गई 'यावर'
वो लौट कर आए हैं तो तब्दील से निकले