उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis sabr-o-raza se tere raste pe rawan hun

जिस सब्र-ओ-रज़ा से तिरे रस्ते पे रवाँ हूँ

جس صبر و رضا سے ترے رستے پہ رواں ہوں

शायर: Sabeen Yunus6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस सब्र-ओ-रज़ा से तिरे रस्ते पे रवाँ हूँ
बातिल के इरादों के लिए कोह-ए-गिराँ हूँ

ऐ माह-ए-मुनव्वर तुझे उस दर की क़सम है
रस्ता वे सुझा दे कि मैं इक पल में वहाँ हूँ

आना न गवारा हो अगर कूचे से उन के
मरक़द मिरा कर दीजे फ़रस्तादा जहाँ हूँ

अफ़्कार न जज़्बों की पज़ीराई जहाँ में
अब अपने ही इदराक से मैं ख़ुद भी निहाँ हूँ

शुनवाई मिरी ज़ात की जिस दर से मुक़द्दर
सर-बस्ता लिए राज़ सभी उस पे अयाँ हूँ

यूँ दामन-ए-रहमत ने छुपा रक्खा है मुझ को
गर्दिश मुझे अब ढूँडती फिरती है कहाँ हूँ