उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis ko dekho bewafa hai aainon ke shahr mein

जिस को देखो बेवफ़ा है आइनों के शहर में

جس کو دیکھو بے وفا ہے آئنوں کے شہر میں

शायर: Ejaz Warsi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस को देखो बेवफ़ा है आइनों के शहर में
पत्थरों से वास्ता है आइनों के शहर में

रोज़ हर्फ़-ए-आरज़ू पर टूटते रहते हैं दिल
रोज़ अर्ज़-ए-मुद्दआ है आइनों के शहर में

क़हक़हे लगते हैं आवाज़-ए-शिकस्त-ए-दिल के साथ
कब कोई दर्द-आश्ना है आइनों के शहर में

हुस्न वालो किस लिए 'एजाज़' से ये इज्तिनाब
इक वही तू पारसा है आइनों के शहर में