उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis ki buniyaad ho jawani par

जिस की बुनियाद हो जवानी पर

جس کی بنیاد ہو جوانی پر

शायर: G R Kanwal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस की बुनियाद हो जवानी पर
देर लगती है उस कहानी पर

आज फिर डूबने का ख़दशा है
आज दरिया है फिर रवानी पर

जाने क्या सोच कर हवाओं ने
लिख दिया नाम मेरा पानी पर

अक्स अपना उसे भी अच्छा लगा
ख़ुश हुआ मैं भी नक़्श-ए-सानी पर

जी भी था उस के साथ चलने का
शक भी था उस की पासबानी पर

कोई सुल्तान हो सका न 'कँवल'
हुक्मराँ दिल की राजधानी पर