उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis ka koi na ho KHuda hoga

जिस का कोई न हो ख़ुदा होगा

جس کا کوئی نہ ہو خدا ہوگا

शायर: Panna Lal Noor6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस का कोई न हो ख़ुदा होगा
जिस का वो भी न हो तो क्या होगा

हासिल-ए-मर्ग और क्या होगा
इक नए ग़म का सिलसिला होगा

आप मुँह फेर के हुए रुख़्सत
ये न सोचा कि मेरा क्या होगा

जिस ने दी है तुम्हें दुआ-ए-इश्क़
कोई मुझ सा ही दिल-जला होगा

लाख सोचूँ न कह सकूँगा कुछ
जब कभी उन का सामना होगा

मैं ने क्या क्या कहा है क़ासिद से
जाने क़ासिद ने क्या कहा होगा