उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jiti raho kahaniyo milte hain yar ek din

जीती रहो कहानियो मिलते हैं यार एक दिन

جیتی رہو کہانیو ملتے ہیں یار ایک دن

शायर: Idris Babar12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जीती रहो कहानियो मिलते हैं यार एक दिन
एक हज़ार एक रात एक हज़ार एक दिन

वाक़'ई जैसे गुम-शुदा शख़्स पलट के आ गया
मुझ से बसर नहीं हुआ एक ही बार एक दिन

मंज़िल-ए-जाँ तक एक दिन पहुँचेगा जो दर अस्ल है
राह में बैठ जाएगा गर्द-ओ-ग़ुबार एक दिन

वो जिसे ढूँडती फिरी तुम ने छपाई डाइरी
याद है यार एक बार याद है यार एक दिन

आँख बचा के ले गया हाथ बढ़ा के ले गया
रात के पार एक ख़्वाब ख़्वाब के पार एक दिन

झूटी हक़ीक़तों से दूर सच्ची कहानियाँ ज़रूर
जीतें तो वापस आ सकें शाह-सवार एक दिन

गाँव से गाँव डाकिये लोगों के ख़त पढ़ा किए
मीर अमन हुआ किए बाग़-ओ-बहार एक दिन

बन के बिखर तो जाऊँगा रौ के सँवर तो जाऊँगा
ख़्वाब-नगर तो जाऊँगा आख़िरी बार एक दिन

बाक़ी ज़माने छोड़ दे फ़ानी फ़साने छोड़ दे
मेरी तरह से मेरी जान ख़ुद पे गुज़ार एक दिन

यार को गाड़ कर सभी गाड़ियों की तरफ़ बढ़े
कटता न था तिरे बग़ैर यारों के यार एक दिन

दुनिया से एक दिन वो शख़्स दिल की तरफ़ फिर आएगा
शह्र में लौट आएगी फिर से बहार एक दिन

क़स्बे की औरतें जने बच्चों सने बने ठने
रेल जहाँ नहीं रुकी खोखरापार एक दिन