उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jazba-e-nakaam ko nakaam hona chahiye

जज़्बा-ए-नाकाम को नाकाम होना चाहिए

جذبۂ ناکام کو ناکام ہونا چاہئے

शायर: Tahir Saood Kiratpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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जज़्बा-ए-नाकाम को नाकाम होना चाहिए
दुश्मनों का इस क़दर इकराम होना चाहिए

मेरी गर्दन भी तनी रहती है नाहक़ के ख़िलाफ़
मेरे सर पर भी कोई इन'आम होना चाहिए

आज मेरे दर्द का तेज़ाब उस ने चख लिया
आज तो ज़ख़्मों तुम्हें आराम होना चाहिए

इक मुनाफ़िक़ आज मुझ पर खुल के ज़ाहिर हो गया
शहर भर में आज जश्न-ए-'आम होना चाहिए

अपने मुस्तक़बिल की आँखों में न हम हरगिज़ लिखें
नाम होने के लिए बदनाम होना चाहिए

क़ैस होना चाहिए 'इश्क़-ए-हक़ीक़ी में 'स'ऊद'
'इश्क़ में इंसान को घन-शाम होना चाहिए