उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jal gain aankhen sabhi KHush-rang chehre uD gae

जल गईं आँखें सभी ख़ुश-रंग चेहरे उड़ गए

جل گئیں آنکھیں سبھی خوش رنگ چہرے اڑ گئے

शायर: Parwez Rahmani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जल गईं आँखें सभी ख़ुश-रंग चेहरे उड़ गए
ऐसी गर्मी थी कि आईनों के पारे उड़ गए

शाम तक भी जब कोई निकला न दाना डालने
आँख भर भर कर मुंडेरों से परिंदे उड़ गए

ख़ुशबुओं के रथ से उतरे बाल पोछा और फिर
तितलियों के दोश पर काफ़ूरी लम्हे उड़ गए

बे-ख़याली मुझ को मेरी सोच तक ले आई और
चौंकते ही मेरे काँधे से फ़रिश्ते उड़ गए

सब के सब कल हर्फ़ हर्फ़ अलमारियों में बंद थे
किस तरह आख़िर किताबों से नविश्ते उड़ गए

आ गया ख़दशात की बाहोँ में यादों का बदन
इक धमाका और ख़्वाबों के परख़चे उड़ गए

थी बड़ी सफ़्फ़ाक मेरे अहद की गूँगी हवा
बस यही कि गर्दनों से सारे रिश्ते उड़ गए