उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan zamin se juDa aasman dikhta hai

जहाँ ज़मीं से जुड़ा आसमान दिखता है

جہاں زمیں سے جڑا آسمان دکھتا ہے

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ ज़मीं से जुड़ा आसमान दिखता है
उसी जगह मुझे अपना मकान दिखता है

पनाह-ए-दश्त में आया दबीज़ शह्र से मैं
यहाँ भी जाल शिकारी मचान दिखता है

सफ़र में आया मिरे एक शह्र ऐसा भी
जहाँ पे दूर से अम्न-ओ-अमान दिखता है

नज़र हमारी अगर हो ज़रा फ़क़ीराना
बहुत सलीस ये सारा जहान दिखता है

सँभल के देख कि ऐ पीर मेरी हस्ती में
तुझे कहीं भी ख़ुदा का निशान दिखता है