उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan usne jafa ki intiha ki

जहाँ उस ने जफ़ा की इंतिहा की

جہاں اس نے جفا کی انتہا کی

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ उस ने जफ़ा की इंतिहा की
वही मेराज थी अपनी वफ़ा की

तुम्हारा हुस्न है मेरी इबादत
जो तुम आए तो याद आई ख़ुदा की

मोहब्बत जिस को रास आ जाए उस को
ज़रूरत क्या दुआ की या दवा की

न था जब मैं तो वो तशरीफ़ लाए
ज़हे मक़बूलियत मेरी दुआ की

मज़ा आया शराब-ए-तुंद का सा
तबीअत उन की जब बरहम हुआ की

मोहब्बत ज़िंदगी की वर्ना ऐ दोस्त
अबस है उम्र ने भी गो वफ़ा की

कमी थी कौन सी दिल की तड़प में
कि उलझन दीन-ओ-दुनिया की अता की

घटा छाई हुई है मय-कदे पर
ये कैफ़िय्यत है चश्म-ए-सुर्मा-सा की

अब आओ भी कि है हम से तुम्हारे
ये गर्मी बज़्म की मस्ती फ़ज़ा की

'हबीब' उस की तरफ़ से ख़ुद कशिश है
ज़रूरत क्या है तुझ को रहनुमा की