उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab wo but ham-kalam hota hai

जब वो बुत हम-कलाम होता है

جب وہ بت ہم کلام ہوتا ہے

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब वो बुत हम-कलाम होता है
दिल ओ दीं का पयाम होता है

उन से होता है सामना जिस दिन
दूर ही से सलाम होता है

दिल को रोकूँ कि चश्म-ए-गिर्यां को
एक ही ख़ूब काम होता है

आप हैं और मजमा-ए-अग़्यार
रोज़ दरबार-ए-आम होता है

ज़ीस्त से तंग हैं न छेड़ हमें
देख ग़ुस्सा हराम होता है

लीजे मूसा से लन-तरानी की
अब तो हम से कलाम होता है

'दाग़' का नाम सुन के वो बोले
आदमी का ये नाम होता है