उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab teri yaad mein machalta hai

जब तिरी याद में मचलता है

جب تری یاد میں مچلتا ہے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब तिरी याद में मचलता है
दिल सँभाले नहीं सँभलता है

चश्म-ए-पुर-नम पे उस की हैराँ हूँ
कैसे पत्थर का दिल पिघलता है

उस में आया तिरे शबाब का रंग
तेरे हाथों जो जाम ढलता है

मुझ तक आने की राह रौशन है
न जले शम' दिल तो जलता है

क्यों पतंगे को शम' की है तलाश
जलने वाला तो यूँ ही जलता है

दौर-ए-मय पर निगाह है किस की
मस्त आँखों का दौर चलता है

दिल में मेरे कहाँ अंधेरा है
आरज़ू का चराग़ जलता है

तुम को आए कि या न आए रास
वक़्त तो करवटें बदलता है

सिलसिले आरज़ू के चलते हैं
दिल का अरमान कब निकलता है

जैसी तेरी नज़र बदलती है
वैसे दुनिया का रुख़ बदलता है

लड़खड़ाया तो पा गया मंज़िल
जो भी सँभला है हाथ मलता है

जज़्बा-ए-दुश्मनी भी आज 'हबीब'
पहलू-ए-दोस्ती में पलता है