उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab tak KHalish-e-dard-e-KHuda-dad rahegi

जब तक ख़लिश-ए-दर्द-ए-ख़ुदा-दाद रहेगी

جب تک خلش درد خدا داد رہے گی

शायर: Yagana Changezi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब तक ख़लिश-ए-दर्द-ए-ख़ुदा-दाद रहेगी
दुनिया दिल-ए-नाशाद की आबाद रहेगी

रूह अपनी है बेगाना-ए-हर-जन्नत-ओ-दोज़ख़
गुम हो के हर इक क़ैद से आज़ाद रहेगी

जो ख़ाक का पुतला वही सहरा का बगूला
मिटने पे भी इक हस्ती-ए-बर्बाद रहेगी

शैतान का शैतान फ़रिश्ते का फ़रिश्ता
इंसान की ये बुल-अजबी याद रहेगी

हाँ वुसअत-ए-ज़ंजीर तक आज़ाद भी हूँ मैं
हस्ती मिरी मजमू'आ-ए-अज़्दाद रहेगी

हर शाम हुई सुब्ह को इक ख़्वाब-ए-फ़रामोश
दुनिया यही दुनिया है तो क्या याद रहेगी

शोहरा है 'यगाना' तिरी बेगाना-रवी का
वल्लाह ये बेगाना-रवी याद रहेगी