उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se wo shoKH mail-e-jaur-o-jafa hua

जब से वो शोख़ माइल-ए-जौर-ओ-जफ़ा हुआ

جب سے وہ شوخ مائل جور و جفا ہوا

शायर: Jaleel Qidwai6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से वो शोख़ माइल-ए-जौर-ओ-जफ़ा हुआ
कुछ अपनी ज़िंदगी का मुझे आसरा हुआ

हासिल था जो सुकून-ओ-फ़राग़त कभी मुझे
ऐ गर्दिश-ए-ज़माना बता तू वो क्या हुआ

डर है ये आरज़ू भी न मिल जाए ख़ाक में
फिर दिल को 'अर्ज़-ए-हाल का कुछ हौसला हुआ

इस बे-ख़ुदी-ए-'इश्क़ पे अपनी मुझे है नाज़
जो कह दिया किसी ने मिरा मुद्द'आ हुआ

तेरी जफ़ा ने ज़ब्त का ख़ूगर बना दिया
तेरे सितम से लुत्फ़-ए-तमन्ना सिवा हुआ

बिस्तर पे यूँ 'जलील' ने कल रात जान दी
सो जाए जिस तरह कोई ग़म से थका हुआ