उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se teri aankh humse phir gai

जब से तेरी आँख हम से फिर गई

جب سے تیری آنکھ ہم سے پھر گئی

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से तेरी आँख हम से फिर गई
हल्का-ए-ग़म में तबीअ'त घिर गई

फ़ौज-ए-मिज़्गाँ में मेरे ख़ूँ के लिए
चश्म की गर्दिश से कौड़ी फिर गई

मोहतसिब की आँख पर जब से चढ़ी
दुख़्त-ए-रज़ शीशे के दिल से गिर गई

ना-तवानों के लिए तूफ़ान क्या
क़तरा-ए-शबनम में जूही तर गई

साक़िया कोई बला था मोहतसिब
ख़ैरियत गुज़री जो ख़ुम के सिर गई

मुर्दा मेरा देख कर बोला वो शोख़
क्यों 'नसीम' अब आँख तेरी फिर गई