उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se nasib mera Thikane pe aa gaya

जब से नसीब मेरा ठिकाने पे आ गया

جب سے نصیب میرا ٹھکانے پہ آ گیا

शायर: Aarif Nazeer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से नसीब मेरा ठिकाने पे आ गया
ख़ुद ही शिकार मेरा निशाने पे आ गया

पर्दा-नशीन पर्दा-नशीनी में गुम रहे
इल्ज़ाम मेरे आँख उठाने पे आ गया

जिस को समझ रहा था फ़क़त आस्तीं का साँप
वो साँप मेरे दिल के ख़ज़ाने पे आ गया

हाथों से उस के छूट गईं रौनक़ें तमाम
इंसान जब से आब पे दाने पे आ गया

तहक़ीक़ की तो अपने मुक़ाबिल था मेरा आप
जब मैं तबाहियों के दहाने पे आ गया

हम ने लहू से जिस को जलाया मुंडेर पर
अब वो चराग़ घर को जलाने पे आ गया

'आरिफ़-नज़ीर’ शौक़ से पीने को आएँगे
तिश्ना-लबों को तू जो पिलाने पे आ गया