उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se badle hain rang parde ke

जब से बदले हैं रंग पर्दे के

جب سے بدلے ہیں رنگ پردے کے

शायर: Aadarsh Dubey4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से बदले हैं रंग पर्दे के
भाव कुछ बढ़ गए हैं कमरे के

आइने आइनों में दिखते थे
इतने चेहरे थे एक चेहरे के

मैं ने देखे हैं सैकड़ों सूरज
आज क़ाबिल नहीं है ज़र्रे के

हम को मंज़िल तलाश करती है
हम मुसाफ़िर हैं ऐसे रस्ते के