उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kabhi uski yaad aai hai

जब कभी उस की याद आई है

جب کبھی اس کی یاد آئی ہے

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब कभी उस की याद आई है
सौ बहारें जिलौ में लाई है

हो न हो उस की याद आई है
उम्र-ए-रफ़्ता को साथ लाई है

बादा-ए-इश्क़ का सुरूर न पूछ
उस ने पी कर मुझे पिलाई है

काश मिल जाए फिर गँवाने को
ज़िंदगी हम ने जो गँवाई है

मुझ को एहसास-ए-रंग-ओ-बू न हुआ
यूँ भी अक्सर बहार आई है

ताबिश-ए-मेहर-ओ-माह है फीकी
जब से वुसअ'त नज़र ने पाई है

तेरे बंदों को क्या हुआ या-रब
तुझ से दावा-ए-आश्नाई है

उस से हम दाद-ख़्वाह-ए-उल्फ़त हैं
जो फ़क़त महव-ए-ख़ुद-नुमाई है

लाला-ओ-गुल में ढूँढने वालो
उस ने सूरत कभी दिखाई है

शिकवा-ए-नारसी-ओ-नाकामी
ए'तिराफ़-ए-शिकस्ता-पाई है