उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kabhi dard ka bazar dikhai de de

जब कभी दर्द का बाज़ार दिखाई दे दे

جب کبھی درد کا بازار دکھائی دے دے

शायर: Umar Khaleeq Azmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब कभी दर्द का बाज़ार दिखाई दे दे
दफ़'अतन मुझ को वो किरदार दिखाई दे दे

एक लहजा जो कभी फूल हुआ करता था
अब जो बोले है तो तलवार दिखाई दे दे

ऐ ख़ुदा बस मुझे दुनिया में यही ख़्वाहिश है
मुझ को अपना कोई ग़म-ख़्वार दिखाई दे दे

चाक पर टूटे हुए दिल भी जुड़ा करते हैं
मैं ये पूछूँगा जो कुम्हार दिखाई दे दे

मौत से क़ब्ल मिरी आख़िरी ख़्वाहिश है यही
काश इक बार वो रुख़्सार दिखाई दे दे