उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ham-safar ho ke bhi ek gam nahin chal sakte

हम-सफ़र हो के भी इक गाम नहीं चल सकते

ہم سفر ہو کے بھی اک گام نہیں چل سکتے

शायर: Umar Khaleeq Azmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम-सफ़र हो के भी इक गाम नहीं चल सकते
हम तिरे साथ सर-ए-आम नहीं चल सकते

दिन में फिर लेते हैं पर याद की शिद्दत के सबब
हम जुनूँ वाले सर-ए-शाम नहीं चल सकते

आरज़ू मेरी भी है साथ चलूँ तेरे मगर
इतने महँगे हैं तिरे दाम नहीं चल सकते

साथ चलने से मना उस ने किया था इक रोज़
आज हम ने कहा मादाम नहीं चल सकते

इश्क़ भी तुम से करूँ और पढ़ाई भी करूँ
एक ही साथ में दो काम नहीं चल सकते

आप ख़ुश-फ़िक्र हैं ख़ुश-रंग भी ख़ुश-नाम भी हैं
पर कमाई में हैं ना-काम नहीं चल सकते