उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-e-muztar ki aashnai se

दिल-ए-मुज़्तर की आश्नाई से

دل مضطر کی آشنائی سے

शायर: Umar Khaleeq Azmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ए-मुज़्तर की आश्नाई से
ग़म लगे अब हैं पारसाई से

तेरी आँखों की एक दीद के बा'द
कोई शिकवा नहीं ख़ुदाई से

दिल नहीं लग रहा तुम्हारे बग़ैर
झूट बोले हैं किस सफ़ाई से

उस से पूछो कि क्या गुज़रती है
जो गुज़रता है बेवफ़ाई से

इश्क़ वालों को मशवरा है मिरा
नींद बेहतर है रत-जगाई से