उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab juda hone ka manzar aa gaya tha

जब जुदा होने का मंज़र आ गया था

جب جدا ہونے کا منظر آ گیا تھا

शायर: Aadarsh Dubey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब जुदा होने का मंज़र आ गया था
एक क़तरे में समुंदर आ गया था

हाथ में जब तेरे पत्थर आ गया था
घर से मैं दीवाना बाहर आ गया था

ढूँढता रहता हूँ आईने में ख़ुद को
कौन मेरे इतने अंदर आ गया था

पी लिया था एक कड़वा घूँट उस ने
ज़ाइक़ा मेरे लबों पर आ गया था

इश्क़ बस पहली दफ़ा अच्छा लगा था
दूसरे चक्कर में चक्कर आ गया था

इस लिए तेरी कहानी से हूँ बाहर
मुझ से इक किरदार बेहतर आ गया था