उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab bhi un se kalam hota hai

जब भी उन से कलाम होता है

جب بھی ان سے کلام ہوتا ہے

शायर: Chandra Parkash Jauhar Bijnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब भी उन से कलाम होता है
हर सुख़न ना-तमाम होता है

इश्क़ जिस के हज़ार मा'नी हैं
एक सादा पयाम होता है

वो नफ़स जिस में तेरी याद न हो
आशिक़ी में हराम होता है

ग़म की अज़्मत न जानने वालो
ग़म का भी इक मक़ाम होता है

कूचा-ए-दोस्त का हर इक ज़र्रा
क़ाबिल-ए-एहतिराम होता है

मौत गो तल्ख़ है मगर इस से
इक सुकून-ए-दवाम होता है

आलम-ए-बे-ख़ुदी में ऐ 'जौहर'
उन से अक्सर कलाम होता है