उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jagte sote hue likhte hain

जागते सोते हुए लिखते हैं

جاگتے سوتے ہوئے لکھتے ہیں

शायर: Yasmeen Hameed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जागते सोते हुए लिखते हैं
शे'र हम रोते हुए लिखते हैं

जब भी लिखते हैं मुकम्मल ख़ुद को
कहीं कम होते हुए लिखते हैं

सुब्ह से शाम तलक भागते हैं
ज़िंदगी ढोते हुए लिखते हैं

कभी उड़ते हैं सितारों की तरफ़
उन में गुम होते हुए लिखते हैं

ख़ुद-बख़ुद सोना उगलती है ज़मीन
हम तो दुख बोते हुए लिखते हैं