उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ja-e-asudgi kahan hai aaj

जा-ए-आसूदगी कहाँ है आज

جائے آسودگی کہاں ہے آج

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जा-ए-आसूदगी कहाँ है आज
जो ज़मीं कल थी आसमाँ है आज

तुम वहाँ थे तो दिल वहाँ था कल
तुम यहाँ हो तो दिल यहाँ है आज

इश्क़ को इब्तिदा में हम समझे
फ़ित्ना-ए-आखिरुज़्ज़माँ है आज

कल अदा दिल का हाल हो कि न हो
सुन लो गोया मिरी ज़बाँ है आज

आरज़ू वस्ल की शहीद हुई
मातम-ए-मर्ग-ए-नौजवाँ है आज

इस हदफ़ पर लगाएँगे वो तीर
दिल-नशीं 'दाग़' का निशाँ है आज