उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itne aasuda kinare nahin achchhe lagte

इतने आसूदा किनारे नहीं अच्छे लगते

اتنے آسودہ کنارے نہیں اچھے لگتے

शायर: Yasmeen Hameed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतने आसूदा किनारे नहीं अच्छे लगते
एक ही जैसे नज़ारे नहीं अच्छे लगते

इतनी बे-रब्त कहानी नहीं अच्छी लगती
और वाज़ेह भी इशारे नहीं अच्छे लगते

ज़रा धीमी हो तो ख़ुशबू भी भली लगती है
आँख को रंग भी सारे नहीं अच्छे लगते

पास आ जाएँ तो बे-नूरी मुक़द्दर ठहरे
दूर भी इतने सितारे नहीं अच्छे लगते

अपनी गुमनामी के सहराओं में ख़ुश रहती हूँ
अब मुझे शहर तुम्हारे नहीं अच्छे लगते